राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित जालोर जिला न केवल अपनी भौगोलिक विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक विरासत और वीर राजपूतों की शौर्यगाथा भी इसे एक विशेष स्थान प्रदान करती है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक, जालोर ने अनेक ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव देखे हैं।
जालोर का प्राचीन इतिहास: जलवद से सुवर्णगिरि तक
प्राचीन नाम: जालोर को पहले जलवद, जलोरपुर, और सुवर्णगिरि जैसे नामों से जाना जाता था।
यह क्षेत्र गुर्जर प्रतिहारों के शासनकाल में एक महत्त्वपूर्ण सैन्य केंद्र रहा।
10वीं शताब्दी में यहाँ परमार वंश का शासन स्थापित हुआ जिन्होंने कई मंदिरों और किलों का निर्माण करवाया।
सोनगरा चौहान और जालोर किले की वीरता
12वीं शताब्दी में सोनगरा चौहान वंश ने जालोर पर अधिकार कर लिया।
इस वंश के महान शासक वीर कान्हड़देव और उनके पुत्र वीरमदेव ने 1311 ई. में अलाउद्दीन खिलजी से जालोर की रक्षा के लिए जीवन बलिदान दे दिया।
जालोर का किला, जिसे सुवर्णगिरि दुर्ग भी कहा जाता है, आज भी उस वीरता का प्रतीक बना हुआ है।
मुगल और ब्रिटिश काल का प्रभाव
खिलजी विजय के बाद जालोर पर दिल्ली सल्तनत और फिर मुगलों का शासन हुआ।
मुगलों ने क्षेत्रीय प्रशासन और सांस्कृतिक विकास में योगदान दिया।
ब्रिटिश काल में यह क्षेत्र जोधपुर रियासत का हिस्सा बना रहा।
स्वतंत्रता के बाद जालोर
1947 में, भारत की स्वतंत्रता से पहले जालोर (Jalore) ब्रिटिश भारत का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह राजपुताना एजेंसी (Rajputana Agency) के अंतर्गत आने वाली सिरोही रियासत (Sirohi State) का हिस्सा था। राजपुताना एजेंसी ब्रिटिश शासन के अधीन कई देशी रियासतों का एक समूह था, जिसे ब्रिटिश राजनीतिक एजेंट नियंत्रित करते थे।
इस प्रकार, 1947 में:
जालोर, सिरोही रियासत के अंतर्गत आता था।
सिरोही रियासत, राजपुताना एजेंसी का भाग थी।
राजपुताना क्षेत्र आज के राजस्थान राज्य का हिस्सा है।
1949 में भारत सरकार द्वारा देशी रियासतों के एकीकरण के बाद सिरोही राज्य को राजस्थान में शामिल किया गया, और फिर जालोर एक ज़िले के रूप में अस्तित्व में आया।

जालोर की प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें
जालोर किला (Jalore Fort)
अरावली की पहाड़ियों पर स्थित यह दुर्ग सामरिक दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण रहा है।
भौगोलिक स्थिति: यह किला एक खड़ी पहाड़ी शिखर पर स्थित है, तीन बुर्जों और गढ़बंदी वाली दीवारों से घिरा हुआ
द्वार (Pols): चार प्रमुख द्वार हैं—सूरज पोल, ध्रुव पोल, चाँद पोल और सीर पोल। विशेषतया सूरज पोल सुबह की पहली किरणों को अंदर आने के लिए बनाया गया
किले तक पहुंचने के लिए उत्तर से तीन किलाबंदी के बीच 3 किमी की सर्पिल चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसमें लगभग एक घंटा लगता है
सुंधा माता मंदिर
1020 मीटर ऊंचे पहाड़ पर स्थित यह मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है।
यह लगभग 900 वर्ष पुराना मंदिर माता चामुण्डा (सुंधा माता) को समर्पित है और यह राजस्थान, जिला जालोर की सुंधा पहाड़ी पर है। ऊंचाई लगभग 1220 मीटर है। यह माउंट आबू से 64 किमी और भिन्माल से मात्र 20 किमी दूर स्थित है
भीनमाल – विद्या की नगरी
भीनमाल को प्राचीन काल में श्रीमाल नगरी कहा जाता था। यह गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त की जन्मभूमि मानी जाती है। भीनमाल गुप्तकाल, मौखरियों और प्रतिहार राजवंशों के समय में विद्या, संस्कृति और समृद्धि का प्रतीक था। यहाँ कई महान विद्वानों ने जन्म लिया, जिन्होंने भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध किया।
मल्कोटा शिव मंदिर
यह मंदिर मल्लीनाथ जी (Raval Mallinath) को समर्पित है, जो राजस्थान के पंचदेवों में से एक स्थानीय लोकदेवता हैं।
मंदिर आलावा गाँव के समीप स्थित है, जहां एक प्राकृतिक गुफा भी है—कुछ वीडियो व्लॉग्स में इसे “hidden waterfall” गुफा के रूप में दिखाया गया है, जो इसे और आकर्षक बनाती है।
हर साल अगस्त महीने में, विशेष रूप से 29 तारीख को, यहाँ मेला आयोजित होता है जो आसपास के गांवों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
जालोर की आज की पहचान
कृषि प्रधान जिला: जीरे के उत्पादन में भारत का अग्रणी जिला।
लोक संस्कृति: घूमर, गैर जैसे लोकनृत्य और मेले इसकी सांस्कृतिक पहचान हैं।
पर्यटन: ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण यह पर्यटकों को आकर्षित करता है।
निष्कर्ष
जालोर केवल एक जिला नहीं, बल्कि राजस्थानी शौर्य, संस्कृति और आध्यात्मिकता का जीवंत प्रतीक है। इसका इतिहास हमें प्रेरणा देता है कि किस प्रकार से पराक्रम, ज्ञान और आस्था एक समाज की नींव को मजबूत बनाते हैं।
🔍 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
जालोर का प्राचीन नाम क्या था?
जालोर को पहले जलवद, सुवर्णगिरि और जलौरपुर के नाम से जाना जाता था।
जालोर किला किसने बनवाया?
जालोर किले का निर्माण परमार शासकों ने किया था, जिसे बाद में सोनगरा चौहानों ने मजबूत किया।
जालोर किसके लिए प्रसिद्ध है?
जालोर जीरा उत्पादन, वीरता की कहानियों, और सुंधा माता मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।
अगर आप राजस्थान की ऐतिहासिक स्थलों या संस्कृति में रुचि रखते हैं, तो जालोर की यात्रा अवश्य करें — यह एक जीवित इतिहास है।
