गुरु पूर्णिमा भारत में हर साल आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन हमारे जीवन में गुरु के महत्व को दर्शाता है। गुरु को भारतीय संस्कृति में भगवान से भी ऊँचा स्थान दिया गया है।
गुरु पूर्णिमा 2025 की तिथि और समय
गुरु पूर्णिमा आरंभ: 10 जुलाई 2025 की रात 12:00 बजे
गुरु पूर्णिमा समाप्त: 11 जुलाई 2025 की रात 12:00 बजे
गुरु पूर्णिमा क्यों मनाते हैं?
भारत में गुरु को केवल एक शिक्षक नहीं बल्कि जीवन का मार्गदर्शक माना जाता है। गुरु हमें अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाते हैं, इसलिए उनका सम्मान करना हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है। यह दिन महर्षि व्यास जी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्हें प्रथम गुरु माना जाता है।
भारत में गुरुओं का महत्व
भारत में गुरु को ‘ब्रह्मा, विष्णु, महेश’ के समान दर्जा दिया गया है।
गुरु ही वह शक्ति हैं जो हमें जीवन की सच्चाई से परिचित कराते हैं।
संत कबीर, तुलसीदास, स्वामी विवेकानंद जैसे महान विभूतियों ने गुरु की महिमा का उल्लेख किया है।
कबीर दास जी के गुरु पर प्रसिद्ध दोहे
1. गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पाय
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।
इसका अर्थ है कि अगर गुरु और भगवान एक साथ खड़े हों, तो पहले गुरु के चरणों में झुकना चाहिए, क्योंकि उन्होंने ही हमें ईश्वर से मिलवाया।
2. सात समुंदर मसि करूं, लेखनि सब बनराय
धरती सब कागद करूं, तऊ गुरु गुण न समाय।
कबीर कहते हैं कि सातों समुद्र को स्याही बना दूँ, पेड़ों को कलम और धरती को कागज, तब भी गुरु के गुण नहीं लिखे जा सकते।
गुरु पूर्णिमा पर क्या करें?
सच्चे गुरु की पहचान करें: झूठे गुरुओं के पीछे न जाएँ।
गुरु के चरणों में श्रद्धा अर्पित करें: अगर गुरु सच्चे हैं, तो उनका सम्मान करें और मार्गदर्शन लें।
गुरु की शिक्षाओं को जीवन में अपनाएँ: केवल पूजा नहीं, उनके ज्ञान को समझें और आचरण में लाएँ।
ध्यान, साधना और सेवा करें: यह दिन आत्मचिंतन और साधना के लिए श्रेष्ठ है।
गुरु का हमारे जीवन में महत्व
गुरु हमारे जीवन में प्रकाश हैं।
वे संशय, अज्ञान और दुख से मुक्ति दिलाते हैं।
आज भी मानवता बची है तो वह इन महान गुरुओं की वजह से।
