मूर्ति पूजा की शुरुआत सबसे पहले किस धर्म में हुई?
मूर्ति पूजा – एक ऐसी धार्मिक परंपरा जो आज दुनिया के कई हिस्सों में प्रचलित है। चाहे मंदिरों में देवताओं की मूर्तियाँ हों, बौद्ध विहारों में बुद्ध की प्रतिमाएँ, या प्राचीन मिस्र में सूर्य देव रा की मूर्तियाँ – मूर्ति पूजा मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण धार्मिक पहलू रही है। लेकिन सवाल उठता है: मूर्ति पूजा की शुरुआत सबसे पहले किस धर्म में हुई थी?
इस ब्लॉग में हम इस प्रश्न का उत्तर इतिहास, पुरातत्व और धर्मशास्त्र के आधार पर जानने का प्रयास करेंगे।
मूर्ति पूजा क्या है?
मूर्ति पूजा का अर्थ है – किसी ईश्वर, देवी-देवता, या दैवीय शक्ति को एक मूर्ति या प्रतीक के माध्यम से पूजना। यह पूजा केवल मूर्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि उसमें श्रद्धा, भावना और ध्यान भी शामिल होता है।
🏛️ मूर्ति पूजा की शुरुआत कहाँ से हुई?
✅ 1. सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) – (3000–1500 ईसा पूर्व)
भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता – सिंधु घाटी सभ्यता – में मूर्ति पूजा के प्राचीनतम प्रमाण मिलते हैं।
मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से प्राप्त मूर्तियाँ दर्शाती हैं कि लोग देवताओं को मूर्ति रूप में पूजते थे।
एक प्रसिद्ध मूर्ति है – योग मुद्रा में बैठे पुरुष की, जिसे कई विद्वान भगवान शिव (पशुपति) का आरंभिक रूप मानते हैं।
मातृ देवी की मूर्तियाँ भी मिली हैं, जिससे शक्ति पूजा की प्राचीन परंपरा का संकेत मिलता है।
📌 निष्कर्ष: यह सभ्यता हिंदू धर्म की जड़ों से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए मूर्ति पूजा की सबसे पुरानी परंपरा यहीं से मानी जाती है।
✅ 2. वैदिक काल और मूर्ति पूजा
वेदों में मूर्ति पूजा का ज़िक्र बहुत कम मिलता है।
वहां मुख्य रूप से यज्ञ, मंत्र और अग्निहोत्र की परंपरा थी।
देवताओं को अमूर्त (formless) रूप में पूजा जाता था – जैसे अग्नि, वायु, इंद्र आदि।
परंतु बाद में, जैसे-जैसे उपनिषद, पुराण, और भक्ति परंपरा विकसित हुई, देवताओं को मूर्ति रूप में पूजा जाने लगा।
✅ 3. अन्य प्राचीन सभ्यताएँ
▶️ मिस्र (Egypt):
वहाँ रा (सूर्य देवता), ओसिरिस, आइसीस जैसे देवताओं की मूर्तियाँ पूजी जाती थीं।
यह परंपरा लगभग 2500 ईसा पूर्व की मानी जाती है।
▶️ ग्रीस और रोम:
ज़ीउस, एथेना, अपोलो जैसे देवताओं की विशाल मूर्तियाँ बनाई जाती थीं।
परंतु ये सभ्यताएँ भारत की सिंधु सभ्यता के बाद आईं।
▶️ बौद्ध धर्म:
शुरू में बुद्ध की मूर्ति नहीं बनाई जाती थी, केवल प्रतीक – जैसे पदचिन्ह, वज्र, बोधि वृक्ष आदि।
बाद में कुषाण काल (100–300 ईस्वी) में बुद्ध की मूर्तियाँ बननी शुरू हुईं।
✨ निष्कर्ष:
🔸 मूर्ति पूजा की शुरुआत का सबसे प्राचीन प्रमाण भारत की सिंधु घाटी सभ्यता से मिलता है।
🔸 यह सभ्यता आधुनिक हिंदू धर्म की जड़ों से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए माना जाता है कि
👉 मूर्ति पूजा की शुरुआत सबसे पहले भारत में और हिंदू परंपरा में ही हुई थी।
🔸 अन्य धर्मों में यह परंपरा बाद में आई, जैसे बौद्ध, जैन, मिस्र, ग्रीस और रोम।
📝 अंतिम विचार
मूर्ति पूजा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मनुष्य की ईश्वर के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। चाहे वह प्राचीन भारत हो या मिस्र – हर जगह इंसान ने ईश्वर को किसी रूप में अनुभव करने की कोशिश की है। और भारत ने इस परंपरा को सबसे पहले जन्म दिया।
