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पिपलोदी, झालावाड़: स्कूल की दीवार गिरने से 7 बच्चों की दर्दनाक मौत – कब सुधरेगी सरकारी स्कूलों की हालत?

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पिपलोदी, झालावाड़ स्कूल की दीवार गिरने से 7 बच्चों की दर्दनाक मौत – कब सुधरेग� (2)

पिपलोदी, झालावाड़ (राजस्थान), 25 जुलाई राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में शुक्रवार सुबह एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई जब एक सरकारी स्कूल की जर्जर दीवार गिरने से 7 मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई और कई बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा तब हुआ जब बच्चे स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे।

यह हृदयविदारक घटना न केवल गांव में मातम का माहौल लेकर आई, बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर गई है। कई परिवारों के चिराग बुझ गए और सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर इन मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन है?

जर्जर भवन और लापरवाही बनी बच्चों की मौत की वजह


स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्कूल पिछले कई सालों से मरम्मत की मांग कर रहा था, लेकिन प्रशासन की अनदेखी और सरकारी तंत्र की सुस्ती के कारण स्कूल की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती रही। दीवार पहले से ही कमजोर थी, जिसे लेकर गांव वालों ने कई बार अधिकारियों को चेताया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

पिपलोदी, झालावाड़ स्कूल की दीवार गिरने से 7 बच्चों की दर्दनाक मौत – कब सुधरेग� (4)
पिपलोदी, झालावाड़ स्कूल की दीवार गिरने से 7 बच्चों की दर्दनाक मौत – कब सुधरेग� (4)

क्या सरकार इस हादसे की जिम्मेदारी लेगी?


सरकारें बच्चों की मौत पर मुआवज़े की घोषणा कर देती हैं – कुछ लाख रुपए देकर परिवारों का मुंह बंद करने की कोशिश होती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन मासूमों की जान की कीमत कुछ रुपयों से लगाई जा सकती है?
नेताओं की सुरक्षा में जहां दर्जनों पुलिस कर्मी तैनात होते हैं, वहीं गरीबों के बच्चों को जर्जर स्कूल भवनों में बैठकर अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है।

क्या इस्तीफों से मिलेगा न्याय?


ऐसे हादसों के बाद अक्सर स्कूल प्रिंसिपल या स्थानीय अधिकारियों के इस्तीफे की बात की जाती है। लेकिन क्या यही असली दोषी हैं?
हकीकत तो यह है कि पूरी व्यवस्था की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने इन मासूमों की जान ली है। अगर समय रहते स्कूल भवन की मरम्मत होती, तो आज ये बच्चे जिंदा होते।

जरूरी सवाल जो हर नागरिक को पूछना चाहिए:
क्या सरकारी स्कूलों की अनदेखी सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाती है?

क्या आम नागरिकों के जीवन की कोई कीमत नहीं है?

क्या इस हादसे के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई होगी?

निष्कर्ष:


पिपलोदी हादसा सिर्फ एक गांव की त्रासदी नहीं, बल्कि देशभर में सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति की असल तस्वीर है। यह वक्त है जब सरकार को अपने वादों से आगे बढ़कर ज़मीनी हकीकत को स्वीकार करना होगा।
हर बच्चे का जीवन अमूल्य है और उसकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है – इसे अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

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