Home राजस्थान कानिया – वेलिया: भीनमाल के दो डाकुओं की दर्दभरी कहानी

कानिया – वेलिया: भीनमाल के दो डाकुओं की दर्दभरी कहानी

0
कनिया-वेलिया भीनमाल

कानिया – वेलिया: भीनमाल के दो डाकुओं की दर्दभरी कहानी – राजस्थान के जालोर ज़िले का भीनमाल क्षेत्र कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। इसी धरती ने दो ऐसे व्यक्तित्वों को भी जन्म दिया जिनकी कहानी आज भी लोकगीतों और कहानियों में जीवित है — कानिया और वेलिया। यह लेख इन दोनों भाइयों की असली कहानी, उनके संघर्ष, अन्याय, और डाकू बनने की यात्रा पर प्रकाश डालता है।

शुरुआत: गरीबी और संघर्ष

उनका जन्म भिनमाल के रावणा राजपूता घर में हुआ था . काना और वेलिया एक समय भीमल सत्र के मशहूर डाकू थे . उनका जन्म भिनमाल के रावणा राजपूता घर में हुआ था . उनके पिता का नाम धनाजी धांधल था .

कनिया और वेलिया का जन्म भीनमाल क्षेत्र के एक अत्यंत गरीब परिवार में हुआ था। इनके परिवार के सदस्य मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते थे। दोनों भाइयों का बचपन भीनमाल में ही बीता।

कनिया स्वभाव से शांत, संयमी और सहनशील था।

जबकि वेलिया नटखट, अशांत और जल्दी उग्र होने वाला बालक था।

गरीबी और संघर्ष के बीच जीवन गुज़ारते हुए, वेलिया ने छोटी-मोटी चोरी करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे कनिया भी उसकी संगत में आकर चोरी जैसे अपराधों में शामिल हो गया।

कनिया-वेलिया आखिरी taseer

पुलिस की उत्पीड़न और पहली गिरफ़्तारी

भीनमाल क्षेत्र में यदि कहीं चोरी हो जाती, तो पुलिस सबसे पहले कानिया और वेलिया को ही पकड़ कर ले जाती। बार-बार हो रही इस झूठी गिरफ़्तारी और उत्पीड़न से ये दोनों परेशान हो चुके थे। उन्हें लगने लगा था कि उन्हें बिना अपराध के ही सज़ा मिलती है।

ठाकुर लाल सिंह से भेंट और नया जीवन

इन हालातों के बीच, एक दिन उनकी भेंट खंडा देवल के ठाकुर लाल सिंह से हुई। ठाकुर साहब ने इन दोनों को गाय चराने का काम दिया और वे खंडा देवल में मेहनत और ईमानदारी से काम करने लगे।

लेकिन कुछ समय बाद खंडा देवल में एक बड़ी चोरी हो गई। दुर्भाग्य से उस चोरी में इन दोनों का कोई हाथ नहीं था, फिर भी जसवंतपुरा पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया।

क्योंकि उस समय खंडा देवल जसवंतपुरा क्षेत्र के अंतर्गत आता था, इसलिए मुक़दमा वहीं चला और बिना पुख़्ता सबूतों के उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा दे दी गई।

फिर से डकैत बनने की ठान ली

इस नाइंसाफी और उत्पीड़न से कानिया और वेलिया का दिल टूट गया। उन्हें यह अहसास हुआ कि अगर बिना अपराध के उन्हें जेल में डाला जा सकता है, तो अब अपराध करने में क्या बुराई है?

यहीं से उन्होंने डाकू बनने की ठानी और जेल से छूटने के बाद वे वास्तव में डकैत बन गए।

डकैती और लोकगाथा में स्थान

कानिया और वेलिया ने भीनमाल, जालोर, सिरोही जैसे इलाकों में डकैतियाँ कीं। कहते हैं कि वे कभी-कभी गरीबों की मदद भी करते थे, इसलिए कुछ लोग उन्हें “राजस्थानी रॉबिन हुड” भी मानते हैं।

सुंधा माता के वे बड़े भक्त माने जाते हैं और कुछ लोककथाओं में यह भी कहा जाता है कि उन्हें माँ का आशीर्वाद प्राप्त था, जिससे वे हर बार पुलिस से बच निकलते थे।

महिला भागीदारी – चम्पा भरवाड़

कुछ संस्करणों में इनकी साथी चम्पा भरवाड़ की भी चर्चा है, जो इनकी हरकतों में साथ थी। वह साहसी महिला थी और शिकारियों के बीच अपना बल दिखाती थी

पकड़ और अंत

अंततः पुलिस (या स्थानीय राजकिय सैनिकों) ने इन्हें घेर लिया और एक लड़ाई के बाद मार गिराया। इसके बाद उनकी वीरता और सुंधा माता की भक्ति की गाथा लोकगाथा बन गई ।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version