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भारत में भ्रूण हत्या: एक गंभीर सामाजिक और नैतिक संकट

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भ्रूण हत्या (Foeticide) भारत में एक गंभीर सामाजिक और नैतिक समस्या बन चुकी है, विशेष रूप से जब यह लिंग आधारित भ्रूण हत्या (Female Foeticide) के रूप में सामने आती है। भारत जैसे देश में, जहाँ नारी को देवी के रूप में पूजा जाता है, वहाँ लड़कियों की भ्रूण हत्या एक गहरी विडंबना और चिंता का विषय ह

भारत में भ्रूण हत्या के आंकड़े

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति वर्ष लगभग 4.5 से 5.5 लाख लड़की भ्रूणों की हत्या होती है।

2000 से 2019 के बीच लगभग 90 लाख लड़कियां गर्भ में ही मार दी गईं।

भारत का लिंग अनुपात लगातार असंतुलित हो रहा है, जो भविष्य में सामाजिक संकट को जन्म दे सकता है।

भारत में भ्रूण हत्या एक गंभीर सामाजिक और नैतिक संकट
भारत में भ्रूण हत्या एक गंभीर सामाजिक और नैतिक संकट

भ्रूण हत्या के कारण

  1. पितृसत्तात्मक सोच

बहुत से परिवार आज भी लड़के को परिवार का वारिस मानते हैं और लड़की को बोझ।अक्सर समाज में यह सोच पाई जाती है कि लड़का बड़ा होकर कमाएगा, घर चलाएगा, और वंश को आगे बढ़ाएगा। वहीं लड़की… बस एक दिन शादी करके किसी और के घर चली जाएगी। इसलिए लोग मान लेते हैं कि लड़का ‘संपत्ति’ है और लड़की ‘जिम्मेदारी’। पर क्या इंसानों को ऐसे तौलना सही है?

  1. दहेज प्रथा

लड़की के जन्म को दहेज से जोड़कर देखा जाता है, जिससे कई माता-पिता जन्म से पहले ही उसे मिटा देते हैं। भारत के ऐसे कई राज्यों में परम्परा है कि लड़की की शादी कराने के लिए मोटा दहेज देना पड़ता। लड़के के पास जितनी बड़ी नौकरी होगी उतना ही ज्यादा दहेज मांगा जाएगा । ऐसे राज्यों में भ्रूण हत्या होती है।

  1. अशिक्षा और जागरूकता की कमी

गांव और छोटे शहरों में लिंग परीक्षण और गर्भपात के दुष्परिणामों की जानकारी बहुत सीमित है। लोगो के मन में ऐसी शिक्षा डाली गई है कि लड़का तो होना ही चाहिए । कई ऐसे घर देखे जाते है जो 4 या 5 लड़कियां पैदा होने के बाद भी लड़के का इंतजार करते है ऐसी परंपराओं को पालने वाले घरों में भी भ्रूण हत्या होती है।

  1. ग़लत चिकित्सा प्रथाएं

हालांकि लिंग परीक्षण पर कानूनी रोक है, फिर भी कई अल्ट्रासाउंड केंद्र गुप्त रूप से यह सुविधा देते हैं।

भ्रूण हत्या के दुष्परिणाम

लिंग अनुपात का असंतुलन: समाज में लड़कों की संख्या लड़कियों की तुलना में अधिक हो रही है, जिससे विवाह और सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा है।

महिलाओं के खिलाफ हिंसा में वृद्धि: जहां लड़कियां कम होती हैं, वहां महिलाओं को कम मूल्य दिया जाता है।

भविष्य की पीढ़ियों पर प्रभाव: यह प्रवृत्ति समाज की नैतिकता को कमजोर करती है।

भ्रूण हत्या को रोकने के उपाय

  1. कानूनी प्रवर्तन
    PCPNDT अधिनियम 1994 के तहत लिंग जांच और भ्रूण हत्या को दंडनीय अपराध माना गया है।

दोषी पाए जाने पर डॉक्टरों और अभिभावकों को जेल और जुर्माने की सज़ा हो सकती है।

  1. शिक्षा और जागरूकता अभियान

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे सरकारी अभियान लोगों को लड़की के महत्व के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

  1. महिलाओं को सशक्त बनाना

शिक्षा, रोजगार और निर्णय लेने के अधिकार देकर महिलाओं को सशक्त बनाना जरूरी है।

निष्कर्ष

भ्रूण हत्या न केवल एक अपराध है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों की हत्या भी है। समाज को अपनी सोच में परिवर्तन लाकर लड़के और लड़की में समानता का भाव लाना होगा। जब हर घर में बेटी को सम्मान और अधिकार मिलेगा, तभी हम एक न्यायपूर्ण और संतुलित भारत की कल्पना कर सकते हैं।

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